फिर जुलाई में ITR भरने का टाइम आता है तो CA बोलता है –
“साहब, क्लबिंग ऑफ इनकम लग गई… 12-15 लाख का अतिरिक्त टैक्स बन रहा है।”
तो चलो आज एकदम साफ-साफ, देसी स्टाइल में सारी कन्फ्यूजन दूर करते हैं।
1. क्लबिंग ऑफ इनकम – ये आखिर है क्या?
इनकम टैक्स एक्ट का सेक्शन 64 बहुत साफ बोलता है:
अगर तुमने अपनी पत्नी को पैसा गिफ्ट किया (या ट्रांसफर किया) बिना कुछ लिए, और उस पैसे से जो भी इनकम हुई (चाहे डिविडेंड हो, इंटरेस्ट हो या कैपिटल गेन), वो तुम्हारी इनकम में जोड़ी जाएगी।
मतलब:
तुम 50,000 रुपये हर महीने बीवी के अकाउंट में डालकर SIP करवा रहे हो?
उस SIP से 2 लाख का लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन हुआ?
वो 2 लाख तुम्हारी इनकम में जुड़ेगा, बीवी की नहीं।
तुम 30% स्लैब में हो तो 60,000 रुपये टैक्स देना पड़ेगा।
2025 में भी ये नियम जस का तस है। बजट में LTCG रेट 10% से 12.5% हुआ, क्लबिंग रूल नहीं बदला।
2. किन-किन इनकम पर क्लबिंग लगती है?
इक्विटी म्यूचुअल फंड का डिविडेंड → क्लबिंग
लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (12.5% टैक्स) → क्लबिंग
शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन (20%) → क्लबिंग
डेट फंड का पूरा प्रॉफिट → क्लबिंग (स्लैब रेट से टैक्स)
हाइब्रिड फंड, इंटरनेशनल फंड, गोल्ड फंड → सबमें क्लबिंग
एक चीज पर नहीं लगती → वो है री-इन्वेस्टेड कमाई
यानी अगर बीवी के नाम फंड में गेन हुआ और वो फिर से उसी फंड में इन्वेस्ट हो गया (ग्रोथ ऑप्शन), तो अगली बार जो गेन होगा, उस पर भी क्लबिंग लगेगी, लेकिन पहले वाला गेन दोबारा नहीं जोड़ा जाता।
3. तो फिर फायदा ही नहीं है क्या?
फायदा है, लेकिन टैक्स बचत का नहीं। बाकी फायदे जबरदस्त हैं:
तलाक या लीगल सेपरेशन में तुम्हारा क्लेम कम हो जाता है
बीवी को फाइनेंशियल कॉन्फिडेंस मिलता है
तुम्हारे बाद नॉमिनी 100% ले लेगी (कोई क्लेम नहीं कर पाएगा)
4. टैक्स सच में बचाना है तो ये 3 लीगल तरीके हैं (2025 में भी काम कर रहे)
सास-ससुर वाला रास्ता (सबसे पॉपुलर)
तुम → सास-ससुर को गिफ्ट → सास-ससुर → बेटी (तुम्हारी बीवी) को गिफ्ट
क्लबिंग नहीं लगती क्योंकि लॉ में सिर्फ spouse और minor child का जिक्र है, सास-ससुर से बहू को नहीं।
(अभी तक 2025 तक कोई केस नहीं आया IT डिपार्टमेंट की तरफ से)
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