कैसे होता था ठगी का खेल?
लोन के नाम पर ठग पहले प्रोसेसिंग फीस, GST, सर्विस चार्ज, इंश्योरेंस फीस आदि के नाम पर 5-10 हजार रुपए तक अलग-अलग किस्तों में वसूलते थे। जैसे ही पीड़ित पैसे ट्रांसफर करता था, ठग उसे ब्लॉक कर देते थे और लोन की कोई प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ती थी।
पुलिस को कैसे मिली सफलता?
एक पीड़ित ने जब वारिसलीगंज थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई और ठगों के बैंक अकाउंट डिटेल्स व UPI आईडी मुहैया कराई, तो पुलिस हरकत में आई। साइबर सेल की मदद से ट्रांजेक्शन ट्रेस किए गए। पता चला कि सारा पैसा बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के अलग-अलग खातों में जा रहा था।
पुलिस ने रेड मारकर वारिसलीगंज और उसके आसपास के इलाकों से तीन आरोपियों को दबोच लिया। गिरफ्तार ठगों के नाम हैं:
- मोहम्मद अजहर (मुख्य सरगना)
- रवि कुमार
- सोनू सिंह
इनके पास से 8 मोबाइल फोन, 15 सिम कार्ड, 5 एटीएम कार्ड और कई फर्जी आधार कार्ड बरामद हुए हैं।
अब तक कितने लोगों से हुई ठगी?
पुलिस के अनुसार अभी तक 50 से ज्यादा शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं और कुल ठगी गई रकम 20 लाख रुपए से ज्यादा आंकी जा रही है। कई पीड़ित अभी भी शर्म या डर की वजह से शिकायत करने से बच रहे हैं।
आप ऐसे ठगों से कैसे बचें? – जरूरी सावधानियां
- कभी भी अनजान लोन ऐप से लोन न लें।
- प्रोसेसिंग फीस या कोई भी पैसा पहले मांगने वाले 100% फ्रॉड होते हैं।
- लोन के लिए हमेशा RBI रजिस्टर्ड बैंक या NBFC से ही संपर्क करें।
- कोई लोन ऑफर व्हाट्सएप या फेसबुक पर आए तो उसे सीधे इग्नोर करें।
- अगर ठगी हो जाए तो तुरंत साइबर क्राइम पोर्टल (cybercrime.gov.in) या 1930 पर कॉल करें
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